क्या पसमांदा शब्द पर पुनः विचार करने की ज़रुरत है?

Summary

पसमांदा आन्दोलन में कई लोगों का मानना है कि पसमांदा शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्यूंकि इस शब्द में उनके दमित और शोषित होने के एहसास और दयनीय अवस्था का बोध छिपा है जबकि उन्हें लगता है कि अब ऐसा नहीं है. या उन्हें लगता है कि दमन और शोषण से लड़ने वाला दमित/शोषित नहीं होता बल्कि एक फाइटर होता है. डॉ. खालिद अनीस अंसारी इसी विषय पर अपने विचार रख रहे हैं.